कोरोना का इलाज पंचगव्य आयुर्वेद से

*कोरोना वायरस* गाय cow coronavirus

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             *कोरोना वायरस*

आजकल हर दूसरे-तीसरे वर्ष अचानक एकदम नई जानलेवा महामारी (epidemic) फैलती है, जिसका नाम तक कभी किसी ने नहीं सुना - हेपेटाइटिस ए, डेंगू, स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया ....। हजारों लोग मरने लगते हैं, पूरी दुनिया में अफरातफरी मच जाती है और फार्मेसी (कॉरपोरेट गिरोह) व उनके दलालों की अरबों खरबों डॉलर की कमाई हो जाती है। GDP बढ़ जाती है। सरकारें खुश हो जाती हैं।

वायरस को हिंदी में विषाणु कहते हैं और देशी गाय के घी को आयुर्वेद विषघ्न (विष नाशक) कहता है। कोई भी रोग जो हवा से फैलता है, उसका सबसे सरल उपचार है नाक में देशी गाय के घी की 2-4 बूंदें डालना। नाक में देशी गाय का घी लगा हो तो वायरस नाक में प्रवेश करते ही घी में चिपककर निष्क्रिय हो जाता है।

*सावधानी :*
* घी दही को मथकर बनाया गया हो, कच्चे दूध की क्रीम या दूध की मलाई से बनाया गया न हो।
* *देशी गाय* का घी हो, गाय का देशी घी न हो।
* घी को गुनगुनाकर 3-4 बूँदें नाक में डालें।
* घी को खींचें नहीं, सामान्य साँस लेते रहें।
* सिर के नीचे से 5 मिनिट के लिए तकिया हटा दें। सिर पीछे की ओर ले जायें। नाक आसमान की ओर।
* घी डालने के बाद 5 मिनिट बोले नहीं।
* घी डालने के बाद 1 घंटे तक पानी न पीयें।
* रात-दोपहर को सोने से पहले इसका प्रयोग करें।
* लोगों के बीच जाने से पहले उंगली से नाक में घी लगा लें।

*विशेष :* नाक में देशी गाय के घी के 90 से अधिक चमत्कारिक लाभ हैं।

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